बेहतर है अब सब चुप रहें
तुम्हारी शिकायतों की लिस्ट
तुम्हारे प्यार से भी बड़ी हो गई
हम तौलने बैठे थे खुद को
इल्जामों के नीचे दब गए
जाओ प्यार सिखाने वाले
तुझे सारे गुनाहों से मुक्त किया
अब वो सारे गुनाह
मेरे सर हो लिए।
~ बोधमिता
दिल की बात, धीरे से कहती हूँ, हौले से सुनना मैं शब्द हूँ ,मुझको भावों में, पिरो कर सुनना ।।

मै सृजन करती
रचनात्मकता का स्वाद लेती
अधरों पर मधुरता रखती
हँसती खिलती स्रष्टि से
कांटे फूल अलग करती
लहू-लुहान होती हूँ
फिर भी
मुस्कान मेरी रहती
क्यूंकि मै हूँ सृजन कर्ता
मै हूँ "माँ"
