मंगलवार, 5 मार्च 2013

पहला नशा

आज कुछ दर्द सा था
 दिल में
कुछ यादें तिरोहित हो
उतरी हैं मन में 
हर बार उन यादों के लिए
बंद रखती थी मै द्वार 
पर आज खटखटा कर
सिसक रही थी वो याद 
मैंने अपने दिल से
आँखों तक का रास्ता
 बंद कर रखा था 
आज आँसुओं का
सैलाब सा
 ले आई है 
मैंने कई बार
कड़क हो
समझाया था तुमको
मै नहीं चाहती हूँ तुम्हे ॥॥ 
क्यूंकि मुझे मेरी
मर्यादाएँ प्यारी थीं 
मगर दिल तुम्हे
पुकारता रहा
बार-बार  
और मैं
लड़कपन का
आकर्षण मान 
होती रही तुमसे दूर
 बहुत दूर 
पर  आज जब
सदा के लिए
दूर हो गए हो तुम 
मैं चाहती हूँ
आ जाओ
एक बार 
बस मैं कह सकूँ
तुमसे कि
तुम थे मेरा
पहला प्यार 
वो गुलाबी फूलों
का गुच्छ
जो दे दिया था
तुमने
छेड़खानी में 
वो सदा ही रहे
मेरी कॉपी में
अधेड़ावस्था
में हूँ अब मैं  
पर न जाने क्यूँ
अब तक उन्हें
अपने से विलग
 न कर सकी
कहो ये आकर्षण था
या अनापेक्षित प्यार ...
जो तुम्हारे सिवा
अब तक
किसी से ना हुआ॥






 





                                   ~ बोधमिता